Hamara Bharat Desh, Hamara Swatantra Bharat

Hamara Bharat Desh

अरबों का घोटाला करते, जनता सबसे हुई परेशान,
अब तो कोई जुगत लगाओ, भष्ट्रों का करो निदान।

देश हमारा लुट रहे है, गजनबी की छोड़ी संतान।
बहुरुपिये छुट्टा घूमे, संसद में है सीना तान।

लकदक इनके कुर्ते देखो, देखो इनकी झूठी शान।
घोटाले ही घोटाले है, घोटालो का क्या करु बखान।

नेता – अफसर सारे भ्रष्ट है, कैसे टूटे इनका अभिमान।
जाकर कहा रपट लिखाऊ, थानेदार सबका प्रधान।

सरकारी मोहर लगी है, चले खूब इनकी दुकान।
चोरों का गठबंधन है ये, डकैतों का होता सम्मान।

योजनाओं पे डाका डाले, अफसर खाते है पकवान।
ईमानदार है भूखे नंगे, चोरों के चेहरे मुस्कान।

गरीबों का पतन हुआ, नेताओं का हुआ उत्थान।
जुआ-सट्टा खुब चले हैं, बम-कट्टे से हुये हलाकान।

दारु बिकती गली-गली है, व्यर्थ हो गया सारा ज्ञान।
अब तो कन्या भ्रूण बचाओ, तो कहलाओगे विद्घवान।

हर बच्चा स्कूल चले जब, पायेगा वो अक्षर ज्ञान।
अंधकार को दूर भगाओ, बनके जलो तुम दिग्वान।

आबादी में करो निमंत्रण, स्वस्थ देश की है पहचान।
देश की दुर्दशा देखके, हो जाता मन सित्र-म्लान।

राजपथ की राह चले अब, गरीब और मजदूर किसान।
राजा-रानी, रंक-फकीर, सबकी हो इक ही पहचान।

नर नारी में फर्क न करना, जागरुकता का चले अभियान।
बच्चों को स्वस्थ बनाओ, जननी कराये स्तनपान।

मां का दूध है अमृत जैसा, अब तो कहता ये विज्ञान।
हरे-भरे न वृक्ष कटवाओ, धरती पे न करो अनुसंधान।

बदलते हुये मौसम को अब, लेना होगा हमें संज्ञान।
संतोष धन है सबसे प्यारा, साधु-संत हुये धनवान।

भ्रष्टाचार का रावण मारो, धनुष उठा के राम समान।

जुड़ें राष्ट्र से.. जुड़ें राष्ट्रवादियों से..

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