झड़ती हुई पत्तियों को देखने का एहसास

मैं चाहता था कि हिंदी में पतझड़ से बेहतर कोई लफ्ज होता। पेड़ों से पत्तियां झड़ रही हैं। पत्तियां पेड़ों के नीचे बिखरी पड़ी हैं। क्या नजारा होता है यह! यह दिल्ली में मार्च महीने में ही देखने में आता है। मुझे लगता है कि पतझड़ को देखकर ही हमारे हिंदू पुरखों ने पुनजर्न्म के बारे में सोचा होगा। यह कल्पना की होगी कि मरने के बाद भी जिंदगी होती है। हम पेड़ों के सिलसिले में ऐसा महसूस करते हैं। वहां पर जीवन व मृत्यु का खेल चलता रहता है। पर ऐसा आदमी के साथ नहीं होता। इसकी कोई नजीर ही नहीं मिलती। क्या किसी ने मरे हुए शख्स को फिर से जन्म लेते देखा है? या जानवर, पंछियों या कीड़ों में भी ऐसा होते देखा है? यों तो हमारी पत्रिकाएं व अखबार अजीबोगरीब खबरें छापते रहते हैं। मसलन, किसी लड़के ने अपने पिछले जन्म के माता-पिता को पहचान लिया। उसने उस जन्म का अपना पता-ठिकाना बता दिया। पर ऐसे किस्से जल्दी ही भुला दिए जाते हैं। अजीब बात यह है कि इस तरह की बातें आम तौर पर हिंदुओं, बौद्धों व सिखों के बीच ही पाई जाती हैं। और ये  गलतफहमी के शिकार रहते हैं। उनके जेहन में मनगढ़ंत पुरा-कथाएं भर दी जाती हैं। आज तक किसी ने ईसाई व मुसलमान बच्चों के मुंह से पिछले जन्म की कोई कहानी नहीं सुनी। इसे गौर करना जरूरी है।

शाद अजीमाबादी
शाद अजीमाबादी के बारे में बहुत कम जानकारी मिलती है। उन्हें कम ही लोग जानते हैं। इतना जरूर तय है कि वह बिहारी थे और पटना में रहते थे। उनका जन्म 1846 में हुआ था और 1927 में उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा। मैंने उनकी कुछ नज्में पढ़ी थीं। उनका अंग्रेजी अनुवाद भी कर दिया था। मैं उनकी कुछ रचनाएं आपकी नजर करना चाहता हूं।
कहां से कहां को
सुनी हिकायत-ए-हस्ती
तो दरमियां से सुनी।
न इब्तिदा की खबर है
न इन्तिहा मालूम।
दरिया-ए-मोहब्बत
मैं हैरत-ओ-हसरत का मारा
खामोश खड़ा हूं साहिल पर।
दरिया-ए-मोहब्बत कहता है
आ कुछ भी नहीं पायाब है हम।
तमन्नाएं
तमन्नाओं में उलझाया गया हूं।
खिलौने दे के बहलाया गया हूं।

 

हरम कॉम्प्लेक्स
भगवान ने पूछा, ‘क्या चाहते हो बच्चा?’ लड़के ने कहा, ‘एक खूबसूरत लड़की।’ भगवान बोले, ‘अगर तुम मुसलमान हो, तो मैं तुम्हारे लिए कैटरीना का इंतजाम कर देता हूं। अगर तुम हिंदू हो, तो मैं तुम्हें करीना दिला दूंगा। फिर अगर तुम सिख हो, तो मैं तुम्हें अनुष्का दे दूंगा। और अगर तुम ईसाई हो, तो मैं तुम्हें जेनेलिया दिलवा दूंगा।’ उसके बाद भगवान ने उससे पूछा, ‘लेकिन बेटा तुम्हारा नाम क्या है?’ लड़के ने जवाब दिया, ‘अब्दुल विजय सिंह फर्नाडिस।’

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